जनवरी 2026 में Vijay Kedia ने इन 2 शेयरों में बढ़ाई अपनी हिस्सेदारी, शेयरों आसमान छू गए!

जनवरी 2026 में दिग्गज निवेशक Vijay Kedia ने अपने पोर्टफोलियो में दो ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्होंने बाजार का ध्यान खींचा है। एक तरफ उन्होंने Patel Engineering Ltd में दोबारा एंट्री की, तो दूसरी तरफ Advait Energy Transitions Ltd में नई हिस्सेदारी जोड़ी। खास बात यह है कि ये दोनों कदम ऐसे समय पर उठाए गए हैं, जब संबंधित शेयरों में बीते साल के दौरान तेज गिरावट देखी गई थी।

यह सवाल स्वाभाविक है जब शेयर दबाव में हों, तब निवेश क्यों? इसी सवाल का जवाब इन चालों के पीछे छिपा है।

Patel Engineering में दोबारा भरोसा क्यों?

Vijay Kedia ने जनवरी 2026 में Patel Engineering में करीब 1 करोड़ शेयर खरीदे, जिससे उनकी हिस्सेदारी लगभग 1.01% हो गई। यह एंट्री करीब पांच तिमाहियों के अंतराल के बाद हुई है।

पिछले एक साल में Patel Engineering का शेयर करीब 37% से 43% तक गिरा था। आम निवेशकों के लिए यह कमजोरी का संकेत हो सकता है, लेकिन अनुभवी निवेशक अक्सर इसे कॉन्ट्रेरियन बेट के रूप में देखते हैं यानी जब बाजार निराश हो, तब वैल्यू तलाशना।

बिजनेस की बात करें तो Patel Engineering ने हाल में हाइड्रोपावर और सिविल कंस्ट्रक्शन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ₹1,700 करोड़ का हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और अन्य एक्सकेवेशन कॉन्ट्रैक्ट्स कंपनी की ऑर्डर बुक (~₹798 करोड़) को सपोर्ट देते हैं। यही वह आधार है, जिस पर लॉन्ग-टर्म निवेशक भरोसा बनाते हैं।

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Advait Energy Transitions में नई एंट्री का मतलब

Vijay Kedia की दूसरी चाल Advait Energy Transitions में नई हिस्सेदारी जोड़ना रही। यहां उन्होंने लगभग 1.14% हिस्सेदारी (करीब 1.25 लाख शेयर) खरीदी, जिसकी वैल्यू उस समय लगभग ₹17 करोड़ आंकी गई।

यह कंपनी पावर ट्रांसमिशन, सब-स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और अब ग्रीन हाइड्रोजन व सोलर जैसे क्षेत्रों में विस्तार पर काम कर रही है। भारत में एनर्जी ट्रांजिशन और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते फोकस को देखते हुए, यह निवेश एक फ्यूचर-फेसिंग थीम को दर्शाता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि कंपनी में अन्य अनुभवी निवेशक, जैसे Ashish Kacholia, की भी मौजूदगी रही है जो अक्सर निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है।

SMILE Philosophy यहाँ कैसे फिट बैठती है?

Vijay Kedia अपनी निवेश रणनीति को SMILE philosophy कहते हैं Small companies, Medium experience, Impressive track record, Large aspirations, Extra-large market potential.

Patel Engineering और Advait Energy—दोनों ही इस फ्रेमवर्क में फिट बैठती दिखती हैं। एक तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर और हाइड्रोपावर जैसे लंबे चक्र वाले बिजनेस, दूसरी तरफ एनर्जी ट्रांजिशन जैसी उभरती थीम। यह संयोजन बताता है कि निवेश का नजरिया शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट से ज्यादा लॉन्ग-टर्म बिजनेस वैल्यू पर केंद्रित है।

निवेशकों के लिए क्या सीख?

इन फैसलों से यह समझ आता है कि:

  • गिरता शेयर हमेशा खराब बिजनेस नहीं होता
  • अनुभवी निवेशक समय और धैर्य को सबसे बड़ा हथियार मानते हैं
  • थीम और ऑर्डर बुक जैसे फैक्टर्स कीमत से ज्यादा मायने रखते हैं

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं कि हर निवेशक को वही कदम उठाने चाहिए। हर किसी की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और लक्ष्य अलग होते हैं।

आगे किन बातों पर नजर रखें?

इन दोनों कंपनियों में आगे निवेशकों को

  • ऑर्डर बुक की प्रगति
  • कैश फ्लो और कर्ज स्थिति
  • प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन
  • और सेक्टर-लेवल पॉलिसी बदलाव

पर नजर रखनी चाहिए। कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन असली कहानी बिजनेस के निष्पादन में छिपी होगी।

निष्कर्ष

जनवरी 2026 में Vijay Kedia की ये दो चालें यह दिखाती हैं कि अनुभवी निवेशक अक्सर भीड़ से अलग सोचते हैं। गिरावट के बीच चुने गए दांव यह संकेत देते हैं कि बाजार की शॉर्ट-टर्म निराशा के पीछे, वे लॉन्ग-टर्म अवसर खोज रहे हैं। आम निवेशकों के लिए यह खबर सलाह नहीं, बल्कि समझ बढ़ाने वाला संकेत है—कि निवेश में धैर्य और रिसर्च क्यों जरूरी है।

⚠️ डिस्क्लेमर

यह लेख केवल जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

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