शेयर बाजार क्यों गिर रहा है? जानें 5 बड़े कारण और निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मार्केट में गिरावट: क्यों गिर रहा है शेयर बाजार और अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?

दोस्तों, अगर आप पिछले कुछ दिनों से मार्केट पर नज़र रख रहे हैं, तो आपने महसूस किया होगा कि बाज़ार में तेज़ी की जगह अब डर और घबराहट का माहौल है। कुछ हफ्तों पहले जो शेयर तेज़ी से भाग रहे थे, अब उनमें भारी गिरावट देखने को मिल रही है। यह गिरावट सिर्फ भारत के बाज़ार में नहीं है, बल्कि दुनिया भर के मार्केट्स में यही हाल है।

ऐसे में, एक आम निवेशक के मन में सबसे बड़ा सवाल आता है: “शेयर बाजार क्यों गिर रहा है?”

क्या यह गिरावट सिर्फ एक छोटा-सा ब्रेक है, या यह किसी बड़े संकट का संकेत है? क्या हमें अपना सारा पैसा निकाल लेना चाहिए, या यह खरीदारी का मौका है? आइए, इस गिरावट को गहराई से (in-depth) समझते हैं। हम एक-एक कारण को विश्लेषित करेंगे ताकि आप डरकर नहीं, बल्कि समझदारी से अपना अगला कदम उठाएँ।

बाज़ार की गिरावट के 5 सबसे बड़े ग्लोबल और लोकल कारण

बाज़ार का गिरना कभी भी किसी एक वजह से नहीं होता, यह हमेशा कई ग्लोबल और लोकल फैक्टर्स का नतीजा होता है। आइए, इन पाँच बड़े कारणों को समझते हैं:

1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज़ी (Rising US Bond Yields)

यह गिरावट का सबसे बड़ा और ग्लोबल कारण है।

  • क्या हो रहा है?: अमेरिकी 10-साल की बॉन्ड यील्ड (US 10-Year Bond Yield) तेज़ी से बढ़कर एक दशक के उच्च स्तर पर पहुँच गई है। यह एक तरह का बेंचमार्क होता है।
  • असर क्या है?: जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि बॉन्ड्स में निवेश करना ज़्यादा सुरक्षित और आकर्षक हो जाता है। निवेशक अपने पैसे को जोखिम भरे शेयर बाजार (risky equity market) से निकालकर सुरक्षित बॉन्ड्स में डालना शुरू कर देते हैं। जब विदेशी निवेशक (FIIs) भारत से पैसा निकालते हैं, तो बाज़ार नीचे गिरता है।

2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Rising Crude Oil Prices)

कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और यह भारत जैसे देश के लिए हमेशा एक बुरी खबर होती है।

  • भारत पर असर: भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने पर:
    • महंगाई (Inflation) बढ़ती है: ट्रांसपोर्टेशन महंगा होता है, जिससे खाने-पीने और बाकी चीज़ों की कीमतें बढ़ जाती हैं।
    • सरकार का खर्च: सरकार को ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD) बढ़ जाता है।
  • निवेशकों पर असर: बढ़ती महंगाई के डर से निवेशक बेचैनी महसूस करते हैं और बाज़ार से दूरी बना लेते हैं।

3. ब्याज दरों में स्थिरता का डर (Fear of High Interest Rates)

पूरी दुनिया के सेंट्रल बैंक (Reserve Banks), खासकर अमेरिका का फेडरल रिज़र्व, अभी भी महंगाई से जूझ रहा है।

  • डर क्या है?: निवेशकों को डर है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों (Interest Rates) को उम्मीद से ज़्यादा समय तक ऊँचा रखेंगे।
  • परिणाम: ऊँची ब्याज दरें कंपनियों के लिए लोन लेना महंगा कर देती हैं और उनकी कमाई (Profits) कम हो जाती है। जब कंपनियों की कमाई कम होती है, तो उनके शेयर की कीमतें गिर जाती हैं।

4. मुनाफावसूली और Valuation चिंताएँ (Profit Booking and Valuation Concerns)

पिछले कुछ महीनों में, भारतीय बाज़ार ने जबरदस्त तेज़ी देखी थी, खासकर स्मॉलकैप और मिडकैप सेक्टर्स में।

  • ** मुनाफावसूली:** जब बाज़ार एक लेवल पर पहुँच जाता है, तो बड़े निवेशक (DIIs) और विदेशी निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित (book profits) करने के लिए शेयर बेचना शुरू कर देते हैं।
  • Valuation: कई शेयरों की कीमतें उनकी असल वैल्यू से बहुत ज़्यादा हो गई थीं। जब बाज़ार गिरना शुरू करता है, तो ये ओवरवैल्यूड शेयर सबसे तेज़ी से नीचे आते हैं। यह एक तरह का ‘Healthy Correction’ होता है।

5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FIIs Selling)

यह लोकल और ग्लोबल दोनों का मिश्रण है। जब US बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बाज़ारों में लगाना शुरू कर देते हैं।

गिरावट में निवेशकों के लिए रणनीति: अब क्या करें?

एक बात याद रखें, शेयर बाजार में गिरावट हमेशा अस्थाई (temporary) होती है, लेकिन ग्रोथ लंबी अवधि (long-term) की होती है। डरकर बेचना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

डरना नहीं, बल्कि समझना है:

यह गिरावट, निवेश के लिए कुछ बेहतरीन मौके लेकर आई है। आपको इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • SIP चालू रखें: अगर आप SIP (Systematic Investment Plan) के ज़रिए निवेश करते हैं, तो उसे कभी न रोकें। गिरावट में आपको वही शेयर सस्ते दाम पर मिलते हैं, जिससे आपकी एवरेज कॉस्ट (average cost) कम हो जाती है।
  • क्वालिटी स्टॉक चुनें: अब वह समय है जब आपको फंडामेंटल रूप से मजबूत (fundamentally strong) कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। हमेशा उस कंपनी में निवेश करें जिसका कर्ज कम हो, मुनाफा बढ़ रहा हो, और भविष्य की ग्रोथ अच्छी हो।
  • सेक्टर पर ध्यान दें: ऐसे सेक्टर्स पर फोकस करें जिन्हें सरकार का समर्थन प्राप्त है, जैसे डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, और ग्रीन एनर्जी

एक रियल-वर्ल्ड केस स्टडी (2020 की गिरावट)

याद कीजिए, मार्च 2020 में जब COVID-19 के कारण बाज़ार अचानक तेज़ी से गिरा था। उस समय जिसने डरकर अपने शेयर बेच दिए, उसे बड़ा नुकसान हुआ। लेकिन जिस निवेशक ने उस गिरावट को खरीदारी का मौका समझा और अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स में निवेश किया, उसने अगले दो सालों में जबरदस्त रिटर्न कमाया। आज की गिरावट, भले ही 2020 जितनी बड़ी न हो, लेकिन मौका वही है।

FAQs: गिरावट से जुड़े आपके सवाल

Q1: क्या यह गिरावट जल्दी ही खत्म हो जाएगी?

जवाब: यह कहना मुश्किल है। जब तक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड स्थिर नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें नहीं गिरतीं, तब तक बाज़ार में अस्थिरता बनी रहेगी।

Q2: क्या मुझे अपना सारा पैसा निकाल लेना चाहिए?

जवाब: बिलकुल नहीं। बाज़ार में गिरावट के समय बेचना हमेशा नुकसानदायक होता है। अगर आपको डर लग रहा है, तो आप नया निवेश रोक सकते हैं, लेकिन नुकसान में बेचना सबसे बड़ी गलती होगी।

Q3: यह गिरावट कब तक चलेगी?

जवाब: बाज़ार के विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ‘Healthy Correction’ है। यह कुछ हफ्तों से लेकर एक-दो महीने तक चल सकती है, लेकिन लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: गिरावट को मौके में बदलें

शेयर बाजार का गिरना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यह बाज़ार का हिस्सा है। एक समझदार निवेशक वह नहीं होता जो बाज़ार के गिरने पर डरता है, बल्कि वह होता है जो गिरावट के कारणों को समझता है और सही रणनीति अपनाकर खरीदारी के मौके खोजता है। डरने के बजाय, अपने पोर्टफोलियो की जाँच करें और भविष्य की ग्रोथ वाली कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाएँ।

आपकी क्या राय है? इस मार्केट करेक्शन को लेकर आपके मन में कोई सवाल हो, या आप अपना अनुभव साझा करना चाहते हों, तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएँ

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Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। स्टॉक मार्केट में निवेश जोखिम के अधीन है। कृपया किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह ज़रूर लें।

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